News Expert - Sushil Sharma
हापुड़ - सरकार भले ही करोड़ों रुपये खर्च कर "स्वच्छ भारत मिशन" को सफल बनाने का दावा करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। शहर में स्वच्छता अभियान केवल कागजों और पोस्टरों तक सीमित रह गया है। नगर पालिका रोजाना कचरा उठाने का काम तो कर रही है, मगर यह कार्य एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के नियमों के उलट किया जा रहा है।
खुले डंपर से फैल रही गंदगी
एनजीटी के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार कचरे को ढके हुए वाहनों से ही ले जाना अनिवार्य है, ताकि प्रदूषण और संक्रमण को रोका जा सके। लेकिन शहर में इस नियम की खुलेआम अनदेखी हो रही है। नगर पालिका के कचरा ढोने वाले वाहन पूरी तरह खुले रहते हैं। परिणाम यह होता है कि मुख्य मार्गों पर चलते समय कूड़े की दुर्गंध हवा में फैलती है और उड़ती धूल लोगों की सांसों में जाती है।
बीमारियों का खतरा बढ़ा
सबसे बड़ी समस्या गीले कचरे से टपकने वाला रस है, जो सड़क पर बहता हुआ पूरे इलाके में गंदगी फैला रहा है। इससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है और डेंगू, मलेरिया समेत संक्रमणजनित बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। राह चलते लोगों को नाक पर रूमाल रखकर गुजरना पड़ता है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश त्यागी ने उठाए सवाल
इस मामले को लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश त्यागी ने नगर पालिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि पालिका स्वच्छ भारत मिशन को मजाक बना रही है।
“सरकार जनता के टैक्स के पैसे से करोड़ों रुपये स्वच्छता अभियान पर खर्च कर रही है, लेकिन हमारे नगर में हालात यह हैं कि कचरा खुले वाहनों में ढोया जा रहा है। यह सीधा-सीधा एनजीटी के आदेशों की अवहेलना है। अगर यह लापरवाही तुरंत नहीं रोकी गई तो कांग्रेस आंदोलन करने को मजबूर होगी।” — राकेश त्यागी, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस
लोगों की आवाज़ उठाने की पहल
राकेश त्यागी ने नगर के नागरिकों के साथ मिलकर इस मुद्दे को लेकर जल्द ही जिलाधिकारी को ज्ञापन देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हर हाल में जनता की आवाज बनेगी और इस गंदगी से निजात दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी।
शिकायतों पर भी नहीं हुई कार्रवाई
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार नगर पालिका के अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है। मगर नतीजा सिफर ही रहा। अधिकारियों की चुप्पी और लापरवाही से लोगों में रोष है। नागरिकों का कहना है कि यह सीधे-सीधे आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है।








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