News Expert - Sushil Sharma
मेरठ - बदलते डिजिटल युग में अपराध का स्वरूप भी बदला है। अब अपराधी तकनीक का सहारा लेकर आम जनता को निशाना बना रहे हैं। साइबर धोखाधड़ी, फिशिंग, पहचान की चोरी, साइबर स्टॉकिंग और बुलिंग जैसे मामलों की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए मेरठ परिक्षेत्र की पुलिस को लगातार प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसी क्रम में अब तक 786 पुलिस अधिकारी-कर्मचारी "साइट्रेन" (Cytrain) प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, जबकि 1050 अधिकारी-कर्मचारी प्रशिक्षणरत हैं।
NCRB की मदद से शुरू हुआ प्रशिक्षण
पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) मेरठ परिक्षेत्र कलानिधि नैथानी ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (NCRB) के सहयोग से गृह मंत्रालय द्वारा ऑनलाइन पोर्टल Cytrain प्रारम्भ किया गया है। इसके माध्यम से पुलिस कर्मियों को साइबर अपराध, साइबर स्वच्छता और साइबर सुरक्षा से जुड़ा विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
डीआईजी नैथानी ने कहा कि “साइबर अपराध एक जटिल प्रवृत्ति का अपराध है। अपराधी तकनीक का दुरुपयोग कर वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य गंभीर अपराधों को अंजाम देते हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए पुलिस बल का प्रशिक्षित होना बेहद आवश्यक है।”
जिलेवार प्रशिक्षण का ब्यौरा
मेरठ जनपद : 223 अधिकारियों/कर्मचारियों ने प्रशिक्षण पूरा किया, 354 प्रशिक्षणाधीन।
बुलन्दशहर जनपद : 314 प्रशिक्षित, 147 प्रशिक्षणरत।
बागपत जनपद : 158 प्रशिक्षित, 518 प्रशिक्षणरत।
हापुड़ जनपद : 91 प्रशिक्षित, 31 प्रशिक्षणरत।
इनमें राजपत्रित अधिकारी, थाना प्रभारी, विवेचक, निरीक्षक, उपनिरीक्षक और सिपाही सभी स्तरों के पुलिस कर्मियों को साइबर अपराध से निपटने का हुनर सिखाया जा रहा है।
नई पहल से मिलेगी मजबूती
डीआईजी नैथानी ने कहा कि यह प्रशिक्षण पुलिस बल को न केवल तकनीकी दृष्टि से सक्षम बनाएगा बल्कि आमजन को साइबर ठगों से बचाने में भी मददगार साबित होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस और भी प्रभावी कार्रवाई कर पाएगी।








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