News Expert - Sushil Sharma
हापुड़ - जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तराखंड में सरकारी सेवा के दौरान दम तोड़ चुके एक कर्मचारी का पहले तो उत्तराखंड सरकार ने विधिवत मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया, लेकिन एक माह बाद हापुड़ नगर पालिका ने भी उसी व्यक्ति का दूसरा मृत्यु प्रमाण पत्र निकाल दिया। दोनों राज्यों से अलग-अलग विवरण वाले प्रमाण पत्र जारी होने से मामला संदेह के घेरे में आ गया है।
जानकारी के अनुसार, जोशीमठ (चमोली) निवासी चंद्रकला की शादी वर्ष 2005 में अरुण कुमार वर्मा से हुई थी। अरुण उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग में पदस्थापित थे। बीते वर्ष 1 जून 2024 को उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद कर्णप्रयाग स्थित सरकारी अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने 19 जून को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया।
फर्जी दस्तावेज़ के आधार पर दूसरा प्रमाण पत्र
चंद्रकला का आरोप है कि जब उन्होंने पति की ग्रेच्युटी और मृतक आश्रित लाभ के लिए विभाग में आवेदन किया तो उन्हें पता चला कि हापुड़ निवासी एक अन्य महिला ने खुद को मृतक की पत्नी बताते हुए लाभ लेने की कोशिश की है। यही नहीं, 19 जुलाई 2024 को हापुड़ नगर पालिका से भी अरुण कुमार वर्मा का एक और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हो गया, जिसमें मृत्यु स्थल हापुड़ अंकित किया गया और पत्नी के नाम पर मीना वर्मा दर्ज किया गया।
लाभ हड़पने की साजिश का आरोप
पीड़िता चंद्रकला ने आरोप लगाया कि किसी महिला ने जालसाजी कर फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर प्रमाण पत्र बनवाया, ताकि वह सरकारी नौकरी और आर्थिक लाभ हड़प सके। पीड़िता ने इस मामले में हापुड़ पुलिस से कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस की जांच शुरू
इस मामले पर एडिशनल एसपी विनीत भटनागर ने बताया कि दो अलग-अलग प्रमाण पत्र सामने आए हैं। शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया है कि किसी अन्य महिला ने फर्जी तरीके से मृतक आश्रित के लाभ पाने के लिए प्रमाण पत्र बनवाया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। यदि जांच में धोखाधड़ी या अन्य आपराधिक कृत्य सामने आते हैं तो दोषियों पर सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।








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