News Expert - Sushil Sharma
हापुड़ - कहते हैं कि “न्याय में देर हो सकती है, लेकिन अंधेर नहीं होता।” यह कहावत हापुड़ के कन्हई उर्फ दयानगर निवासी हरिराज के मामले में पूरी तरह सच साबित हुई है। गलत दस्तावेजीकरण और लोन के बोझ के कारण हरिराज पिछले 22 सालों से न्याय के लिए भटक रहे थे, लेकिन अब उन्हें राहत मिल गई है। हापुड़ की एसडीएम सदर इला प्रकाश ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दस्तावेज दुरुस्त कराए और आखिरकार पीड़ित को न्याय दिलाया।
गलत तरीके से चढ़ा था लोन
जानकारी के मुताबिक, हरिराज के पिता ने करीब 90 हजार रुपये का लोन लिया था, जिसे समय पर चुकता भी कर दिया गया था। लेकिन विभागीय लापरवाही और गलत दस्तावेजीकरण के चलते यह लोन हरिराज के नाम पर चढ़ गया। नतीजतन उनकी जमीन और दस्तावेजों में गड़बड़ी हो गई। हरिराज को सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तर पर परेशानियों का सामना करना पड़ा।
22 साल तक दर-दर की ठोकरें
हरिराज ने बताया कि वे पिछले 22 सालों से तहसील और अन्य सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे थे। कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन किसी ने उनकी सुनवाई नहीं की। इस लंबे संघर्ष ने उनकी जिंदगी को मुश्किलों से भर दिया।
एसडीएम ने की पहल
मामला जब एसडीएम सदर इला प्रकाश के संज्ञान में आया तो उन्होंने बिना देर किए दस्तावेजों की गहन जांच कराई। सच्चाई सामने आने के बाद लोन का गलत रिकॉर्ड हटवाया गया और सही दस्तावेज तैयार कर हरिराज को सौंप दिए गए।
भावुक हुए पीड़ित
सही कागजात हाथ में पाकर हरिराज भावुक हो गए। उन्होंने कहा,“22 साल से जिस दर्द और अपमान को झेल रहा था, उससे आज छुटकारा मिला है। एसडीएम मैडम ने मेरी जिंदगी बदल दी। मैं उन्हें दिल से आशीर्वाद देता हूँ।”
जनता ने की कार्यशैली की सराहना
एसडीएम इला प्रकाश की संवेदनशील पहल की क्षेत्रभर में सराहना हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह प्रशासन की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यदि हर अधिकारी जनता की समस्याओं को इतनी गंभीरता से सुने, तो किसी को भी वर्षों तक न्याय के लिए भटकना न पड़े।









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