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श्रवण नक्षत्र में रक्षाबंधन: राहुकाल छोड़ 7:25 से 2:23 तक श्रेष्ठ मुहूर्त


News Expert - Sushil Sharma 

हापुड़ - भाई-बहन के प्रेम, सौहार्द और रक्षा संकल्प का पावन पर्व रक्षाबंधन इस बार शनिवार, 9 अगस्त को धूमधाम से मनाया जाएगा। इस बार का रक्षाबंधन विशेष रहेगा, क्योंकि यह सर्वार्थसिद्धि योग और सौभाग्य योग जैसे शुभ संयोगों में भद्रा रहित समय पर मनाया जाएगा।

भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा के अध्यक्ष, ज्योतिर्विद पंडित के.सी. पाण्डेय ‘काशी वाले’ ने बताया कि श्रावण पूर्णिमा 8 अगस्त को दोपहर 2:12 बजे से 9 अगस्त को दोपहर 1:24 बजे तक रहेगी, जबकि श्रवण नक्षत्र 9 अगस्त को दोपहर 2:23 बजे तक रहेगा।

क्यों खास है यह रक्षाबंधन?

पंडित पाण्डेय के अनुसार, शास्त्रमत से रक्षाबंधन तब श्रेष्ठ माना जाता है जब यह सूर्योदयकालीन पूर्णिमा और श्रवण नक्षत्र में हो तथा भद्रा रहित अपरान्हकाल में मनाया जाए। इस बार 9 अगस्त को सूर्योदय 5:49 बजे होगा।

गुलिक काल: सुबह 5:49 से 7:25 तक (अशुभ)

राहुकाल: सुबह 9:06 से 10:45 तक (अशुभ)

शुभ मुहूर्त: सुबह 7:25 से दोपहर 2:23 तक लगातार शुभ समय रहेगा, जिसमें राहुकाल को छोड़कर बहनें भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।

इस अवधि में श्रवण नक्षत्र, सर्वार्थसिद्धि योग, सौभाग्य योग, अभिजीत मुहूर्त, बल एवं विजय मुहूर्त जैसे अत्यंत शुभ संयोग रहेंगे। इस समय राखी बांधने से भाई-बहन दोनों को आयु, यश, कीर्ति, प्रेम और समृद्धि की प्राप्ति होगी।


शास्त्रीय महत्व

रक्षाबंधन को श्रावणी पर्व भी कहा जाता है, जिसमें ब्राह्मण, गुरु या आचार्य द्वारा मंत्र-अभिमंत्रित रक्षासूत्र बांधने का विशेष महत्व है। इस दिन दसविध दिव्य स्नान और जनेऊ बदलने का विधान भी है।

धर्मग्रंथों के अनुसार:

कर्तव्यो रक्षिताचारो द्विजान् सम्पूज्य शक्तितः

अर्थात, ब्राह्मण सहित सभी वर्ण और मानवगण, ब्राह्मण आचार्य का पूजन करें, दान दें और उनसे रक्षासूत्र बंधवाएं।

रक्षा सूत्र बांधते समय यह मंत्र बोला जाता है

येन बद्धो बलि राजा दानवेंद्रो महाबलः।

तेन त्वां प्रति बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।

इससे उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

क्या न करें?

पंडित पाण्डेय ने चेताया कि प्रतिपदा तिथि के साथ रक्षाबंधन नहीं करना चाहिए, क्योंकि नन्दा योग में रक्षासूत्र बांधना अशुभ माना गया है। विशेष परिस्थिति में ही धनिष्ठा नक्षत्र के साथ दोपहर बाद या रात तक राखी बांधने की अनुमति दी जाती है।






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