News Expert - Sushil Sharma
हापुड़। शहर की दो नाबालिग छात्राएं इंस्टाग्राम पर रील बनाने की दीवानगी में इस हद तक उलझ गईं कि परिजनों की डांट-फटकार से नाराज होकर घर से निकल पड़ीं। दोनों 11 सितंबर को स्कूल जाने के बहाने घर से निकलीं और देर शाम तक वापस न लौटीं। परिजनों ने थाने में सूचना दी तो पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों को दिल्ली रेलवे स्टेशन से सकुशल बरामद कर लिया। बच्चियों के सुरक्षित लौटने पर परिवारजनों ने राहत की सांस ली और पुलिस का आभार जताया।
सोशल मीडिया का असर और रील बनाने का शौक
पुलिस पूछताछ में बच्चियों ने कबूला कि उन्हें इंस्टाग्राम पर रील बनाना पसंद था। पढ़ाई में ध्यान न देने पर जब उन्हें घरवालों ने टोका तो वे नाराज हो गईं और घर छोड़ दिया। उनका इरादा कहीं दूर जाने का नहीं था, बल्कि वे गुस्सा जताना चाहती थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में रील्स बनाना युवाओं की नई रुचि बन गई है। लेकिन यही शौक कई बार पढ़ाई और पारिवारिक जिम्मेदारियों से ध्यान भटका देता है।
रील बनाने के फायदे
रील्स बनाना सिर्फ बुरा ही नहीं है। यदि सही दिशा में किया जाए तो यह कला और रचनात्मकता को निखारने का माध्यम भी है। कई युवाओं ने इसी माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाकर पहचान बनाई और करियर की राह खोली। रील्स के जरिए कला, संगीत, शिक्षा और सामाजिक संदेश भी लाखों लोगों तक आसानी से पहुंच रहे हैं।
रील बनाने के नुकसान
लेकिन जब यह शौक लत में बदल जाता है तो नुकसानदेह साबित होता है। पढ़ाई पर असर पड़ना, परिवार से संवाद कम होना, गलत संगति में पड़ने का खतरा और साइबर क्राइम का शिकार होना इसकी बड़ी चुनौतियां हैं। कई बार लाइक्स और फॉलोअर्स की होड़ में बच्चे जोखिम भरे स्टंट तक कर डालते हैं, जिससे जान तक खतरे में पड़ जाती है।
पुलिस और विशेषज्ञों की अपील
सीओ वरुण मिश्रा ने कहा कि अभिभावक बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर समय-समय पर उनसे संवाद करें। वहीं, मनोविज्ञान विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को डांटने से ज्यादा जरूरी है उनकी रुचियों को समझना और उन्हें सही दिशा देना। संवाद और सहयोग से ही ऐसे मामलों पर अंकुश लगाया जा सकता है।









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