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हापुड़ को मिली देश की पहली इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर यूनिट, ऑटोनेक्स्ट ऑटोमेशन ने विश्व ईवी दिवस पर रचा इतिहास



News Expert - Sushil Sharma 

हापुड़ - विश्व ईवी दिवस पर हापुड़ ऐतिहासिक उपलब्धि का साक्षी बना। ऑटोनेक्स्ट ऑटोमेशन ने यहां भारत की पहली इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर निर्माण इकाई की शुरुआत का जश्न धूमधाम से मनाया। यह न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए स्वच्छ ऊर्जा और कृषि तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ा कदम साबित हुआ है।

ऑटोनेक्स्ट ऑटोमेशन, जिसकी स्थापना वर्ष 2016 में श्री कौस्तुभ धोंडे ने की थी, पहले ही भारत का पहला 45 हॉर्सपावर इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर विकसित कर चुकी है। अब हापुड़ में बनी नई यूनिट किसानों को पर्यावरण-हितैषी और किफायती समाधान उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और तकनीकी प्रशिक्षण के नए अवसर खोलने जा रही है।


किसानों के लिए नए युग की शुरुआत

इस फैक्ट्री में तैयार होने वाले बड़े आकार के इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर आधुनिक तकनीक से लैस हैं। इनमें गहन जुताई, बड़े पैमाने पर खेती-किसानी और ड्राइवर की सुविधा के लिए स्मार्ट कंट्रोल सिस्टम और आरामदायक सीटिंग जैसी व्यवस्थाएं हैं।

पंकज गोयल का दूरदर्शी नेतृत्व

इस परियोजना का नेतृत्व सह-संस्थापक और मुख्य परिचालन अधिकारी श्री पंकज गोयल ने किया है। उन्होंने कहा "यह इकाई केवल एक फैक्ट्री नहीं है, बल्कि अवसर का मंच है। हम किसानों को टिकाऊ समाधान देने के साथ-साथ युवाओं को भविष्य की ईवी टेक्नोलॉजी में दक्ष बनाना चाहते हैं। अब जिन प्रशिक्षण अवसरों के लिए युवाओं को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, वे सब हापुड़ में ही मिलेंगे।"


गौरतलब है कि श्री गोयल ब्रेनवेव्स इंटरनेशनल स्कूल, हापुड़ के अध्यक्ष भी हैं। शिक्षा और उद्योग दोनों में उनकी सक्रिय भूमिका यह दर्शाती है कि तकनीकी प्रगति को युवाओं की शक्ति से जोड़कर हापुड़ को वैश्विक स्तर पर आगे ले जाया जा रहा है।

रोजगार और कौशल विकास का नया केंद्र

इस फैक्ट्री ने पहले ही निर्माण, असेंबली, गुणवत्ता नियंत्रण और सेवा सहयोग जैसे क्षेत्रों में रोजगार सृजित करना शुरू कर दिया है। यहां विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं, जिनमें पीएमएसएम ट्रैक्शन मोटर, लिक्विड-कूल्ड कंट्रोलर और एलएफपी बैटरी पैक जैसी उन्नत ईवी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये कौशल आज वैश्विक ईवी उद्योग में सबसे अधिक मांग में हैं।


आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम

हापुड़ की यह यूनिट प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत और ग्रीन एनर्जी विज़न की दिशा में बड़ा योगदान है। यह न केवल कार्बन उत्सर्जन को कम करेगी, बल्कि किसानों को लागत-प्रभावी और ऊर्जा-संवहनीय कृषि उपकरण भी उपलब्ध कराएगी।

हापुड़ का बढ़ता गौरव

विश्व ईवी दिवस पर ऑटोनेक्स्ट ऑटोमेशन की यह पहल हापुड़ को भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मानचित्र पर सशक्त रूप से स्थापित करती है। अब हापुड़ न केवल शिक्षा और उद्योग के क्षेत्र में बल्कि सतत कृषि और हरित तकनीक में भी देशभर में अपनी पहचान बनाने जा रहा है।






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