News Expert - Sushil Sharma
हापुड़ - एक न्यूज चैनल पर प्रसारित वीडियो क्लिप में उर्वरक की किल्लत और बढ़े दामों को लेकर भ्रामक व झूठी जानकारी सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। कृषि विभाग ने साफ कहा है कि जनपद हापुड़ में खरीफ सीजन के दौरान अप्रैल से अब तक किसी भी उर्वरक की कमी नहीं रही। सितम्बर तक पर्याप्त मात्रा में स्टॉक मौजूद है।
वर्तमान में जिले में करीब 4159 मीट्रिक टन यूरिया और 3004 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है, जो लगभग एक महीने की आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
सरकार द्वारा तय दर पर मिल रहा यूरिया
कृषि विभाग ने बताया कि उर्वरक कंपनियां विक्रेताओं को वही दर देती हैं जो भारत सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है। जुलाई माह में कृषि अधिकारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस पर विस्तार से चर्चा भी हुई थी। जनपद में यूरिया बैग (45 किलो) लगभग 240 से 250 रुपये में विक्रेताओं को सप्लाई किया जाता है। ऐसे में किसी भी विक्रेता द्वारा अधिक दाम पर बिक्री का सवाल ही नहीं उठता। साथ ही सभी कंपनियां अधिकृत बिल के साथ ही उर्वरक सप्लाई करती हैं।
डीलर की असलियत आई सामने
प्रशासन ने खुलासा किया कि जिस उर्वरक विक्रेता का इंटरव्यू वीडियो में दिखाया गया है, वही डीलर अनुदानित उर्वरकों के डाइवर्जन (ग़ैरकानूनी बिक्री) में संलिप्त पाया गया है। जांच में सामने आया कि उसने अपनी चार फर्मों के जरिए किसानों के लिए आवंटित नीम कोटेड यूरिया और अन्य उर्वरक जनपद व प्रदेश से बाहर बड़ी मात्रा में बेचे। यह जानकारी भारत सरकार के IFMS पोर्टल से भी प्रमाणित हुई।
कृषि अधिकारी की जांच के बाद इस डीलर और उसकी संबंधित फर्मों पर 24 जुलाई 2025 को थाना हापुड़ देहात में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 और फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर 1985 के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई।
पहले भी पकड़ा जा चुका है घोटाला
यही नहीं, यह वही व्यक्ति है जिसकी संलिप्तता गत वर्ष 5 अगस्त 2024 को ग्राम जरौठी स्थित एक प्लाईवुड फैक्ट्री में नीम कोटेड यूरिया की काला-बाज़ारी के मामले में सामने आई थी। उस वक्त भी थाना हापुड़ देहात में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था।
नकली कीटनाशक बेचने के आरोप भी साबित
इस उर्वरक विक्रेता की कीटनाशक फर्म पर भी गंभीर आरोप लगे थे। किसानों ने अधोमानक और नकली कीटनाशक बेचने की शिकायत की थी। जांच में यह शिकायत सही पाई गई और कृषि अधिकारी ने कीटनाशक अधिनियम 1968 और नियम 1973 के तहत इस फर्म और उसके मालिक के खिलाफ न्यायालय में वाद दायर कर दिया है।
किसानों का बढ़ा भरोसा
प्रशासन की इस कार्यवाही के बाद जनपद के किसानों ने राहत की सांस ली है। किसानों ने कहा कि अब उन्हें गुणवत्तापूर्ण उर्वरक और कीटनाशक समय पर और निर्धारित दरों पर मिल रहे हैं। प्रशासन ने भी साफ कर दिया है कि कृषक हित सर्वोपरि है, किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होगा।
झूठी खबरों से प्रशासन की छवि खराब
अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि इस तरह की भ्रामक व निराधार खबरें न सिर्फ किसानों को गुमराह करती हैं, बल्कि शासन-प्रशासन की छवि धूमिल करने का भी प्रयास है। ऐसे मामलों में आगे भी कठोरतम कार्यवाही की जाएगी।









Post a Comment