News Expert - Sushil Sharma
लखनऊ - उत्तर प्रदेश सरकार ने परिषदीय स्कूलों के एकीकरण (मर्जर) को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। अब किसी भी स्कूल को तब तक मर्ज नहीं किया जाएगा, जब तक वह एक किलोमीटर की परिधि में नहीं आता हो। साथ ही जिन स्कूलों में 50 से अधिक छात्र नामांकित हैं, उन्हें मर्ज नहीं किया जाएगा। यह ऐलान प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने लोक भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया।
शिक्षा मंत्री ने साफ किया कि पहले से मर्ज हो चुके ऐसे स्कूल, जो इन दो मानकों पर खरे नहीं उतरते, उन्हें 'अनपेयर' कर पुनः स्वतंत्र किया जाएगा। ऐसे स्कूलों में फिर से पढ़ाई शुरू कराई जाएगी।
बाल वाटिका का नया प्रारूप
मंत्री ने बताया कि जिन भवनों में स्कूल मर्ज होने के बाद खाली स्थान उपलब्ध है, वहां अब महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से बाल वाटिका की स्थापना की जाएगी। इसमें 3 से 6 साल के बच्चों के लिए विशेष पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। इन केंद्रों के संचालन हेतु करीब 18 हजार बाल वाटिका एजुकेटर्स की भर्ती GeM पोर्टल के माध्यम से की जा रही है।
स्कूल बंद नहीं होंगे, टीचर की भर्ती होगी
मंत्री संदीप सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार का मकसद किसी भी स्कूल को बंद करना या शिक्षकों की नियुक्ति को रोकना नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्र-शिक्षक अनुपात के मानक के अनुसार, 50 छात्रों वाले स्कूल में दो सहायक अध्यापक और एक विषय शिक्षक की तैनाती की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर नई भर्तियां भी की जाएंगी।
मर्जर का उद्देश्य - गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संसाधनों का समुचित उपयोग
बेसिक शिक्षा विभाग ने 16 जून 2025 को मर्जर संबंधी आदेश जारी किया था, जिसके तहत प्रदेश भर में 10,827 स्कूलों का एकीकरण किया गया था। सरकार का दावा है कि इससे बच्चों को बेहतर शिक्षण सुविधाएं मिलेंगी। लेकिन इसके खिलाफ कुछ अभिभावकों और छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
सीतापुर की छात्रा कृष्णा कुमारी सहित 51 बच्चों की याचिका पर सुनवाई के बाद 7 जुलाई को कोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन दूसरी याचिका पर सुनवाई करते हुए लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सीतापुर के 210 में से 14 स्कूलों के मर्जर पर रोक लगा दी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी।
सीएम अभ्युदय स्कूल और मॉडल कंपोजिट विद्यालय की शुरुआत
सरकार प्रदेश के प्रत्येक जिले में मुख्यमंत्री अभ्युदय कंपोजिट विद्यालय (कक्षा 1 से 8) और मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय (कक्षा 1 से 12) की स्थापना कर रही है।
अभ्युदय स्कूल में 450 छात्रों के लिए स्मार्ट क्लास, पुस्तकालय, कम्प्यूटर लैब, सीसीटीवी, शुद्ध पेयजल, मिड-डे मील किचन सहित आधुनिक सुविधाएं दी जाएंगी।
मॉडल स्कूलों को 30 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जाएगा, जहां 1500 छात्रों के लिए साइंस लैब, डिजिटल लाइब्रेरी, खेल मैदान, और कौशल विकास केंद्र होंगे। यहां कला, वाणिज्य और विज्ञान संकाय की पढ़ाई भी होगी।
शिक्षक संगठनों ने जताई थी आपत्ति
उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ की अध्यक्ष सुलोचना मौर्य ने चिंता जताते हुए कहा था कि स्कूलों की दूरी बढ़ने से बच्चों की पढ़ाई पर नकारात्मक असर पड़ेगा, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां अभिभावक वाहन की सुविधा नहीं जुटा पाते।
वहीं, प्राइमरी शिक्षक संघ के अध्यक्ष योगेश त्यागी ने इसे शिक्षा का अधिकार अधिनियम और बाल संरक्षण कानून का उल्लंघन बताया था।
28 हजार स्कूल पहले ही हो चुके हैं मर्ज
बेसिक शिक्षा परिषद के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017-18 में प्रदेश में 1.58 लाख स्कूल थे। इसके बाद करीब 28 हजार कम छात्र संख्या वाले स्कूलों का मर्जर किया गया, जिससे हजारों शिक्षकों के पद प्रभावित हुए और कई प्रधानाध्यापक पद समाप्त हो गए।
छात्र संख्या में गिरावट चिंता का विषय
जहां 2021-22 में सरकारी स्कूलों में नामांकित छात्रों की संख्या 1.91 करोड़ तक पहुंच गई थी, वहीं बीते तीन वर्षों में यह आंकड़ा गिरकर 1.49 करोड़ तक सिमट गया है। इसे लेकर सरकार फिर से स्कूल चलो अभियान के तहत नामांकन बढ़ाने की दिशा में प्रयास कर रही है।







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