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गला दबाकर पत्नी की हत्या, पति, सास और देवर को उम्रकैद, कोर्ट का कड़ा संदेश


News Expert - Sushil Sharma 

हापुड़ - जनपद की बाबूगढ़ थाना क्षेत्र में वर्ष 2018 में पत्नी की हत्या के मामले में हापुड़ पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस की मजबूत विवेचना और अभियोजन टीम की सशक्त पैरवी के चलते अदालत ने बुधवार को पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन को आजीवन कारावास और दो को तीन-तीन वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है।

यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक द्वारा चलाए जा रहे 'ऑपरेशन कन्विक्शन' अभियान के तहत न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

2018 में हुई थी सीमा की गला दबाकर हत्या

मामला 22 जुलाई 2018 का है, जब बाबूगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम रमपुरा निवासी सुनील पुत्र इन्द्राज ने अपनी पत्नी सीमा की गला दबाकर हत्या कर दी थी। इस हृदयविदारक घटना को अंजाम देने में उसके साथ उसकी मां संतोष, भाई अनिल, बंटी और बॉबी भी शामिल थे।

पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी के खिलाफ 498A, 302, 34 आईपीसी के तहत मुकदमा पंजीकृत किया और 22 अक्तूबर 2018 को आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित कर दिया।

पांचों दोषियों को मिली सजा, कोर्ट ने सुनाया फैसला

करीब सात साल की न्यायिक प्रक्रिया के बाद 31 जुलाई 2025 को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय हापुड़ की अदालत ने सभी पांच आरोपियों को दोषी मानते हुए निम्नानुसार सजा सुनाई:

सुनील (पति), अनिल (देवर) और संतोष (सास) को आजन्म कारावास एवं 7,000-7,000 रुपये के अर्थदंड की सजा दी गई।


बंटी और बॉबी (दोनों देवर) को 3-3 वर्ष का साधारण कारावास तथा 2,000-2,000 रुपये के जुर्माने से दंडित किया गया।

सशक्त विवेचना और प्रभावशाली पैरवी बनी सफलता की कुंजी

इस पूरे मामले में हापुड़ पुलिस की ओर से की गई गुणवत्तापूर्ण विवेचना और प्रभावी अभियोजन ने न्याय दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई।

मामले में विवेचक उप निरीक्षक मुकेश कुमार, शासकीय अधिवक्ता श्री विजय कुमार चौहान, पैरोकार महिला कांस्टेबल मोनू और कोर्ट मोहर्रिर महिला कांस्टेबल पुष्पा का विशेष योगदान रहा, जिसकी सराहना की जा रही है।

ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत न्याय में तेजी

गौरतलब है कि प्रदेश में चल रहे ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत संगीन अपराधों में आरोपियों को न्यूनतम समय में सजा दिलाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। इस केस में भी हापुड़ पुलिस ने तत्परता, साक्ष्य संकलन और समयबद्ध अभियोजन के जरिए उदाहरण पेश किया है।

यह फैसला न केवल न्याय की जीत है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि महिला उत्पीड़न या हत्या जैसे अपराधों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।






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