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फिर जांच के घेरे में सरस्वती मेडिकल कॉलेज


News Expert - Ajay Verma 

हापुड़ - एक बार फिर सरस्वती मेडिकल कॉलेज प्रशासनिक जांच के घेरे में आ गया है। शुक्रवार को ड्रग इंस्पेक्टर (DI) ने कॉलेज परिसर स्थित मेडिकल स्टोर पर औचक छापेमारी करते हुए चार दवाओं के सैंपल जांच हेतु लिए। कार्रवाई के दौरान दवाओं के स्टॉक रजिस्टर, एक्सपायरी तिथियों, अनुमति पत्रों, और लाइसेंस संबंधी दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की गई।

यह कार्रवाई ऐसे वक्त हुई है जब कॉलेज पर पहले से ही गंभीर आरोपों की परतें चढ़ी हुई हैं।

पहले छात्र की मौत, फिर फूड डिपार्टमेंट की छापेमारी

कुछ महीने पहले कॉलेज में इलाज के दौरान एक छात्र की मौत हुई थी। घटना के बाद जांच टीम तो गठित हुई, लेकिन आज तक न तो मौत की असली वजह सामने आई, न ही कोई जिम्मेदारी तय की गई।

इसके अलावा फूड विभाग ने भी कॉलेज कैंपस स्थित कैंटीन पर दो बार छापे मारे, जहां गंदगी, अस्वास्थ्यकर खाना, वेंडर लाइसेंस का अभाव, तथा फूड सेफ्टी एक्ट का खुला उल्लंघन पाया गया। बावजूद इसके, कोई कठोर कार्रवाई नहीं की गई।


अब सवाल दवाओं की गुणवत्ता पर, और गहरा हुआ संदेह

अब मेडिकल स्टोर पर मिली संदिग्ध दवाओं ने एक नई चिंता खड़ी कर दी है। यदि ये सैंपल जांच में फेल होते हैं, तो मामला सीधे-सीधे औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के अंतर्गत आता है, जिसमें 2 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और भारी जुर्माना तक का प्रावधान है।

क्या प्रशासन की सख्ती केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी?

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि सरस्वती मेडिकल कॉलेज पर जितने भी मामले सामने आए हैं, प्रशासन की ओर से कोई ठोस, निर्णायक कार्रवाई नहीं दिखती। क्या यह छापेमारी भी बाकी मामलों की तरह कागज़ों में दफ्न हो जाएगी?”

लोगों का यह भी आरोप है कि प्रशासन रसूखदार संस्थानों पर सख्ती दिखाने से कतराता है।

सरकार और प्रशासन से उठते तीन बड़े सवाल

1. क्या सैंपल जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी?

2. क्या छात्र की मौत और फूड छापे की रिपोर्टों को सार्वजनिक किया जाएगा?

3. यदि दोष सिद्ध हों तो क्या संस्थान की मान्यता पर पुनर्विचार किया जाएगा?

जनहित में कठोर कदम जरूरी

यदि सरकार और प्रशासन वास्तव में स्वास्थ्य व शिक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर गंभीर हैं, तो अब समय आ गया है कि सिर्फ कागजी कार्रवाई से आगे बढ़कर सख्त और निर्णायक कदम उठाए जाएं। अन्यथा, यह ढिलाई किसी बड़े जनहानि या हादसे का कारण बन सकती है।






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