News Expert - Sushil Sharma
हापुड़। शराब की लत एक बार फिर रिश्तों पर भारी पड़ती नजर आई। रेलवे रोड पर शुक्रवार की रात एक महिला अपने ही शराबी पति की पिटाई का शिकार बन गई। घटना के समय महिला लहूलुहान हालत में सड़क पर फूट-फूटकर रोती नजर आई और मदद की गुहार लगाती रही। राहगीरों की तत्परता से महिला की जान तो बच गई, लेकिन उसके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान और दिल पर लगे जख्म साफ दिखाई दिए।
मिली जानकारी के अनुसार, महिला का पति शराब के नशे में धुत था और सड़क किनारे लड़खड़ाता हुआ खड़ा था। उसकी पत्नी उसे घर ले जाने आई तो उसने आव देखा न ताव, बीच सड़क पर ही उसकी बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी। हैरानी की बात यह रही कि पति की आंखों में न कोई पछतावा था और न किसी कानून या समाज का भय।
मारपीट इतनी क्रूर थी कि महिला के सिर और चेहरे से खून बहने लगा। यह देख राहगीरों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और महिला को उसके शराबी पति से किसी तरह छुड़ाया। घायल महिला को एक रिक्शे की मदद से नजदीकी डॉक्टर के पास उपचार के लिए भेजा गया। रिक्शे में बैठी महिला लगातार रोती रही और कहती रही, "मेरे पति मुझे रोज मारते हैं, वो मुझे मार डालेंगे... पहले भी दो बार जान लेने की कोशिश कर चुके हैं।
शराब बना घरेलू हिंसा की जड़
घटना ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि शराब न केवल शरीर को, बल्कि रिश्तों और समाज को भी बर्बाद कर रही है। घरेलू हिंसा के ज्यादातर मामलों में शराब की भूमिका अहम मानी जाती है। आए दिन ऐसे मामले सामने आते हैं, जहां पति नशे की हालत में पत्नी को पीटता है, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना देता है।
इस घटना ने यह भी उजागर किया है कि शराब की लत किस तरह एक महिला की अस्मिता, सुरक्षा और जीवन को दांव पर लगा सकती है। जबकि नशे में धुत व्यक्ति को न परिवार की चिंता होती है, न कानून का डर। ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि कोई और महिला इस तरह की पीड़ा का शिकार न हो। अभी तक पीड़ित महिला द्वारा कोई शिकायती पत्र पुलिस को नहीं दिया गया है।
राहगीरों की सराहनीय भूमिका
घटना के दौरान राहगीरों ने जिस संवेदनशीलता और साहस का परिचय दिया, वह तारीफ के काबिल है। अगर वे समय रहते हस्तक्षेप न करते, तो कोई अनहोनी हो सकती थी। महिला को इलाज के लिए पहुंचाने और स्थिति को संभालने में उनकी भूमिका सराहनीय रही।







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