News Expert - Sushil Sharma
पिलखुवा। रेलवे ट्रैक पर चलना एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ। कोतवाली क्षेत्र के रेलवे रोड स्थित फाटक के पास शनिवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में 65 वर्षीय वृद्ध की ट्रेन की चपेट में आकर मौके पर ही मौत हो गई। मृतक मोहल्ला लुहारान निवासी बताए गए हैं। हादसे के बाद जीआरपी व स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
जानकारी के अनुसार, सुरेंद्र (65) शनिवार सुबह किसी कार्यवश रेलवे स्टेशन की ओर जा रहे थे। रोज की तरह इस बार भी उन्होंने मुख्य सड़क की बजाय रेलवे ट्रैक के किनारे चलना बेहतर समझा। लेकिन यही लापरवाही उनकी जान की दुश्मन बन गई।
जैसे ही वह रेलवे रोड स्थित फाटक के पास पहुंचे, उनका एक पैर पटरी की कैची में फंस गया। इससे पहले कि वह खुद को छुड़ा पाते, उसी समय गाजियाबाद से हापुड़ की ओर आ रही अवध असम एक्सप्रेस वहां से गुजरने लगी। वृद्ध ट्रेन की चपेट में आ गए और मौके पर ही उनका निधन हो गया।
मौके पर उमड़ी भीड़, परिजनों में कोहराम
हादसे के तुरंत बाद घटनास्थल पर राहगीरों की भीड़ जमा हो गई। किसी ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में जीआरपी और स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई। पहचान के बाद परिजनों को सूचित किया गया। वृद्ध की मौत की खबर से घर में कोहराम मच गया।
ट्रैक पर चलना बना मौत की वजह
यह घटना न केवल दुखद है, बल्कि एक चेतावनी भी है। रेलवे ट्रैक के किनारे या उस पर चलना लोगों के लिए आम बात बन गई है, लेकिन यह आदत किस कदर जानलेवा हो सकती है, इसका उदाहरण सुरेंद्र की मौत है। रेलवे बार-बार लोगों से अपील करता है कि वे ट्रैक पर न चलें, लेकिन लापरवाही के चलते ऐसे हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे।
जीआरपी की अपील – रेलवे ट्रैक को पार करना न बनाएं आदत
रेलवे व जीआरपी अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन की ओर जाने के लिए फुटओवर ब्रिज या निर्धारित मार्गों का उपयोग करें। रेलवे ट्रैक पर पैदल चलना कानूनन अपराध है और यह जान जोखिम में डालने जैसा है।
पिलखुवा की यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि समाज के लिए एक कड़वी सीख है। नियमों की अनदेखी और छोटी-सी लापरवाही कब बड़ी दुर्घटना बन जाए, कहना मुश्किल है। यदि समय रहते लोग जागरूक न हुए तो ऐसे हादसे आगे भी दोहराए जा सकते हैं।







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