News Expert - Sushil Sharma
हापुड़। स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले हापुड़ में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) और प्रशासन के बीच दो दिनों तक खिंची तनातनी आखिरकार प्रशासनिक हस्तक्षेप से शांत हो गई। संगठन ने हापुड़ सदर की एसडीएम इला प्रकाश और क्षेत्राधिकारी जितेंद्र शर्मा पर अभद्रता के आरोप लगाते हुए दोनों अधिकारियों को हटाने की मांग पर एसडीएम कार्यालय पर करीब डेढ़ दिन तक धरना दिया। वहीं, प्रशासन ने मामले में निष्पक्ष जांच का आश्वासन देकर विवाद सुलझा लिया।
कैसे शुरू हुआ विवाद
13 अगस्त को भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने तिरंगा यात्रा का आयोजन किया। यात्रा समाप्त होने के बाद संगठन को एसडीएम को ज्ञापन सौंपना था। लेकिन इससे पहले एसडीएम इला प्रकाश ने अवैध खनन पर कार्रवाई करते हुए एक ट्रैक्टर-ट्रॉली सीज कर दी।
किसान नेता ज्ञानेश्वर त्यागी का कहना है कि ट्रैक्टर के पास अनुमति थी, इसलिए उसे छोड़ा जाना चाहिए था। उन्होंने फोन पर एसडीएम से बात की, तो एसडीएम ने कहा— “अगर अनुमति थी, तो चालक भागा क्यों? उसे कागज़ दिखाने चाहिए थे, सीज करने की नौबत नहीं आती।” इसके बाद बातचीत बीच में ही खत्म हो गई। किसान नेताओं का आरोप है कि इस व्यवहार से उनकी “मान-प्रतिष्ठा को ठेस” पहुंची।
ज्ञापन लेने में भी विवाद
इसी दौरान एसडीएम मीटिंग में थीं, तो उन्होंने नायब तहसीलदार को ज्ञापन लेने भेजा, जिसे संगठन ने मना कर दिया। बाद में एसपी कुंवर ज्ञानंजय सिंह के निर्देश पर सीओ जितेंद्र शर्मा ज्ञापन लेने पहुंचे, लेकिन ज्ञापन सौंपते समय वहां भी तीखी नोकझोंक हो गई। किसानों ने सीओ पर भी अभद्रता का आरोप लगाया।
दो दिन का धरना, प्रशासन की एंट्री
इसके बाद संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता एसडीएम कार्यालय पर धरना देकर बैठ गए और नारेबाजी करते हुए एसडीएम व सीओ को हटाने की मांग करने लगे। करीब डेढ़ दिन बाद शाम को एडीएम संदीप कुमार और एएसपी विनीत भटनागर पहुंचे और किसान नेताओं से करीब एक घंटे तक वार्ता की। दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी कि दोनों ओर से निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और सोमवार को पुनः वार्ता होगी।
एसडीएम की कार्यशैली की तारीफ भी
एसडीएम इला प्रकाश के बारे में एसडीएम कार्यालय में मौजूद फरियादियों का कहना है कि उनके आने के बाद से आम जनता के कार्य समय पर निपटाए जा रहे हैं। उनका स्वभाव सहज और शांत है, और वे कानून के दायरे में रहकर काम करती हैं। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि खनन माफिया पर कार्रवाई और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता उनकी प्राथमिकता है, और यही कुछ लोगों को नागवार गुजर रहा है।
किसानों के आरोप
किसान संगठन के नेताओं का कहना है कि एसडीएम और सीओ का रवैया किसान हित में नहीं है और उनकी बातों को हल्के में लिया जाता है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि जांच में किसानों के पक्ष को न्याय नहीं मिला, तो वे आंदोलन तेज करेंगे।









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