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डीएम, एसपी हुए भावुक, विभाजन स्मृति दिवस पर गूंजा दर्द और बलिदान का संदेश



News Expert - Sushil Sharma 

हापुड़ - 14 अगस्त 1947 — यह तारीख भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में स्वतंत्रता की खुशी के साथ-साथ विभाजन की विभीषिका का दर्द भी समेटे हुए है। देश की आजादी के साथ हुए भारत-पाकिस्तान विभाजन ने करोड़ों लोगों को उजाड़ दिया और लाखों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इसी ऐतिहासिक त्रासदी की याद में हर साल 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाता है, ताकि आने वाली पीढ़ियां उस समय के भयावह परिणामों से अवगत रहें।

गुरुवार को नगर पालिका परिषद सभागार में जिलाधिकारी अभिषेक पांडे, पुलिस अधीक्षक कुंवर ज्ञानंजय सिंह और मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु गौतम ने विभाजन के दौरान अपने प्राण गंवाने वाले लोगों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर विभाजन के समय पाकिस्तान से विस्थापित होकर हापुड़ में बसने वाले परिवारों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।


कार्यक्रम के दौरान आत्मा राम मदन लाल की कहानी ने माहौल को भावुक कर दिया। उन्होंने बताया कि विभाजन के समय वे मात्र 10 वर्ष के थे। उनके माता-पिता ने उन्हें पाकिस्तान से भारत जाने वाली ट्रेन में बैठा दिया, लेकिन जिस डिब्बे में वे बैठे थे, उसमें पहले से ही लाशों के ढेर थे। वह भारत तो पहुंच गए, पर स्टेशन पर उनकी आंखें अपने माता-पिता के इंतजार में लगी रहीं, जो काफी लंबे समय बाद आए। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान आने वाली लगभग हर ट्रेन मौत की गवाही देती थी बोगियों में सवार लोग जीवित से अधिक मृत होते थे।

आत्मा राम मदन लाल की यह दर्दनाक स्मृति सुनकर जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और सीडीओ भावुक हो गए। मंच से उतरे और सभी शरणार्थियों को शाल ओढ़ाकर उनका मान-सम्मान किया।


जिलाधिकारी अभिषेक पांडे ने कहा, “विभाजन केवल एक राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि यह मानवीय त्रासदी थी। लाखों लोगों को अपने घर, जमीन और परिवार छोड़ने पड़े। यह दिन हमें सिखाता है कि समाज में नफरत और हिंसा की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।”

पुलिस अधीक्षक कुंवर ज्ञानंजय सिंह ने कहा, “हम उन लोगों के बलिदान को कभी नहीं भूल सकते जिन्होंने इस त्रासदी में अपनों को खोया। हमारी जिम्मेदारी है कि हम देश की एकता, भाईचारे और शांति को बनाए रखें ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।”

अधिकारियों ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाता रहेगा कि स्वतंत्रता का मूल्य बहुत बड़ा है और इसे सुरक्षित रखना हम सभी का कर्तव्य है।





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