News Expert - Sushil Sharma
हापुड़ - हापुड़ की अदालत ने कचहरी के बाहर हुई नृत्यपथ हत्या मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रथम) विपिन कुमार द्वितीय की अदालत ने कुख्यात अभियुक्तों सुनील चचूड़ा, वीरू उर्फ वीरपाल और पप्पन उर्फ संजय को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए उन्हें गंभीर धाराओं के तहत दंडित किया। अदालत ने दोषियों के खिलाफ कठोर दंड के साथ जुर्माने का भी प्रावधान किया है। वहीं कुल 13 अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।
सजा का ब्योरा धाराओं के तहत फैसला
अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई के बाद कहा कि मुख्य आरोपियों सुनील, वीरू व पप्पन पर हत्या की सजा (धारा 302/34) लागू होगी और उन्हें आजीवन कारावास के साथ 50-50 हजार रुपए जुर्माना भी देना होगा। इसी के अतिरिक्त, अदालत ने धारा 307 (हत्या के प्रयास) के तहत भी उन्हें 10-10 वर्ष का कठोर कारावास तथा 50-50 हजार रुपए जुर्माने का आदेश दिया।
घटना का पूरा किनारा
यह घटना 16 अगस्त 2022 की है, जब फरीदाबाद जेल से पुलिस हिरासत में लखन को हापुड़ कोर्ट में पेश करने लाया जा रहा था। कचहरी के गेट पर ही पहले से घात लगाए हमलावरों ने पुलिस वाहन से उतरते ही ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, गोलीबारी में लखन गंभीर रूप से घायल हुआ और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। हरियाणा पुलिस का एक कॉन्स्टेबल ओमप्रकाश भी गोली लगने से घायल हुआ था। हमलावर घटना के बाद फरार हो गए थे।
रंजिश और साजिश का पड़ताल
पुलिस की जाच में यह मामला 2019 में धौलाना के ग्राम उदयरामपुर नंगला में हुई दोहरे हत्याकांड का प्रतिशोध बताया गया। उस वारदात में हरियाणा के अनंगपुर निवासी सागर और सचिन की गोली मारकर हत्या की गई थी और उस घटना में लखन आरोपी था। मुख्य साजिशकर्ता मोलू ने पुरानी रंजिश के चलते इस कातिलाना योजना को अंजाम देने का आरोप है।
साक्ष्य और सुनवाई
प्रोसेक्यूशन ने कुल 26 गवाहों के बयान दर्ज कराए, जबकि बचाव पक्ष ने 7 गवाह पेश किए। पुलिस ने शुरुआती चरण में कुल 18 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। साक्ष्य और गवाहियों के आधार पर अदालत ने कुछ के खिलाफ सबूत पर्याप्त नहीं पाये और उन 13 आरोपियों को बरी कर दिया — जिनमें कुलदीप, सचिन उर्फ सच्चे, अमित उर्फ ऐम्मी, सुभाष, शिवम पंडित, अंकित, मनीष, अमित, भोला जाट, सतेंद्र उर्फ भोलू, सुमित, मोहित व रणदीप भाटी शामिल हैं।
वर्तमान नज़ारा
फैसले के बाद दोषियों को पहले से ही डासना व गौतमबुद्धनगर की जेलों में बंद रखा गया है। अदालत के आदेश के बाद मामले की आगे की कानूनी कारवाई व अग्रिम कार्यवाही पुलिस और अधिवक्तागण मिलकर कर रहे हैं।













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