News Expert - Sushil Sharma
हापुड़ - उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर नीला परचम लहराने की तैयारी है। बसपा सुप्रीमो मायावती आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दलितों में अपनी मज़बूत पैठ और राजनीतिक शक्ति का प्रदर्शन करने जा रही हैं। इसके लिए उन्होंने बसपा संस्थापक स्वर्गीय कांशीराम की पुण्यतिथि 9 अक्तूबर का दिन चुना है। लखनऊ स्थित श्री कांशीराम स्मारक स्थल पर होने वाली यह रैली बसपा के इतिहास में सबसे बड़ी रैलियों में से एक मानी जा रही है।
हापुड़ से निकला बसपा कार्यकर्ताओं का काफिला
इस ऐतिहासिक रैली में शामिल होने के लिए बुधवार को हापुड़ जनपद से 52 बसों और करीब 50 कारों में लगभग 5,000 कार्यकर्ता लखनऊ के लिए रवाना हुए। रवाना होने से पहले बसपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में जबरदस्त जोश और उत्साह देखने को मिला। पूरे शहर में “बहन जी तुम्हीं सहारा, दलित समाज का एक ही नारा” जैसे नारे गूंजते रहे। कार्यकर्ताओं ने बताया कि वे रैली में बहन मायावती का संबोधन सुनने के लिए बेहद उत्साहित हैं।
रैली को बताया गया ऐतिहासिक और निर्णायक
बसपा नेता विपिन दीवान ने कहा कि यह रैली केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि “दलित चेतना और सामाजिक न्याय” का महाकुंभ है। उन्होंने दावा किया कि लखनऊ की रैली में करीब सात लाख से अधिक कार्यकर्ताओं के जुटने की संभावना है, जो आने वाले विधानसभा चुनाव का रुख तय करेगी। विपिन दीवान ने कहा कि प्रदेश का दलित वर्ग आज पूरी तरह से जागरूक है और जान चुका है कि उसकी असली आवाज कौन है।
विपिन दीवान ने कहा कि “बहन मायावती केवल एक नाम नहीं, बल्कि दलित अस्मिता और सामाजिक सम्मान की प्रतीक हैं। कांशीराम जी ने जो सपना देखा था ‘बहुजन समाज की भागीदारी और बराबरी का अधिकार’ उसे पूरा करने का काम बहन मायावती जी ने किया है। आज प्रदेश का हर दलित, हर पिछड़ा, हर वंचित समाज यह समझ चुका है कि उनके हक की लड़ाई केवल बहुजन समाज पार्टी ही लड़ सकती है। भाजपा सरकार में दलित समाज का सबसे अधिक शोषण हुआ है, चाहे वो आरक्षण का सवाल हो, उत्पीड़न के मामले हों या फिर नौकरियों में भेदभाव।
हम पूरे प्रदेश से यह संदेश लेकर लखनऊ जा रहे हैं कि अब अन्याय के खिलाफ संघर्ष का बिगुल बज चुका है। 2027 में उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत के साथ बसपा की सरकार बनने जा रही है, क्योंकि जनता बदलाव चाहती है और वह बदलाव केवल मायावती जी ही ला सकती हैं। यह रैली आने वाले चुनाव की दिशा तय करेगी। बहन मायावती जी का नेतृत्व ही वह ताकत है जो दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज को एकजुट कर सकती है। अब वक्त आ गया है जब हम सब एक होकर बहुजन समाज के मिशन को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।”
जनता के बीच मायावती के संदेश की गूंज
रैली में शामिल होने जा रहे कार्यकर्ताओं ने कहा कि कांशीराम जी की पुण्यतिथि का यह अवसर समाज को उनके संघर्ष और मिशन की याद दिलाने वाला है। हापुड़ समेत पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बसपा कार्यकर्ता बड़े स्तर पर लखनऊ पहुंच रहे हैं। नेताओं का कहना है कि यह रैली दलित समाज में नई ऊर्जा और एकता का प्रतीक बनेगी।
बसपा की यह रैली न सिर्फ 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति का सूत्रपात मानी जा रही है, बल्कि दलित राजनीति के पुनरुत्थान का संदेश भी दे रही है।















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