News Expert - Sushil Sharma
हापुड़ -जिला हापुड़ में बुधवार का दिन बेटियों के नाम रहा। मिशन शक्ति अभियान के तहत ऐसा नज़ारा देखने को मिला जिसने पूरे जिले में चर्चा का विषय बना दिया। सिंभावली क्षेत्र के आईएसके इंटर कॉलेज की कक्षा 12 की छात्रा नैन्सी को “एक दिन की जिलाधिकारी” बनने का मौका मिला।
सुबह जब वह अपने स्कूल ड्रेस में आत्मविश्वास भरे कदमों से कलेक्ट्रेट पहुंचीं, तो वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने तालियों की गूंज के बीच उनका स्वागत किया। थोड़ी देर बाद जिलाधिकारी अभिषेक पांडे ने नैन्सी को औपचारिक रूप से डीएम की कुर्सी का चार्ज सौंपा। उसी क्षण नैन्सी का चेहरा गर्व और जिम्मेदारी से चमक उठा।
कलेक्ट्रेट पहुंचते ही दिखाई नेतृत्व की झलक
डीएम की कुर्सी संभालते ही नैन्सी ने सबसे पहले महिला सुरक्षा, बालिका शिक्षा, स्वच्छता और बाल सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा “महिलाओं से जुड़ी योजनाएं तभी सफल होंगी, जब वे गांव और मोहल्ले के स्तर तक पहुंचें। हर बेटी को आत्मनिर्भर और शिक्षित बनाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।”
नैन्सी ने कहा कि उनका सपना बचपन से आईएएस अधिकारी बनने का रहा है, और आज का दिन उनके जीवन का “प्रेरणादायक पड़ाव” है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि गांवों में निजी सहयोग से पुस्तकालय स्थापित किए जाएं, तो ग्रामीण छात्राओं को आगे बढ़ने में बड़ी मदद मिलेगी।
निरीक्षण में दिखाई सख्ती, अधिकारियों को दिए निर्देश
चार्ज लेने के बाद नैन्सी ने कलेक्ट्रेट भवन के विभिन्न विभागों का निरीक्षण किया — शस्त्र अनुभाग, खाद्य एवं औषधि विभाग, एनआईसी, और आपदा प्रबंधन कक्ष का जायजा लिया। इस दौरान उन्हें कई जनसुनवाई प्रार्थनापत्र भी प्राप्त हुए, जिनमें भूमि विवाद से संबंधित मामले प्रमुख थे। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया “किसी भी शिकायत को लंबित न रखा जाए। हर नागरिक को समय पर न्याय मिले यही प्रशासन का दायित्व है।”
वास्तविक डीएम ने की सराहना, कहा “यही है मिशन शक्ति की असली भावना”
डीएम अभिषेक पांडे ने नैन्सी को सम्मानित करते हुए कहा “मिशन शक्ति अभियान का उद्देश्य ही यह है कि बेटियों में आत्मविश्वास और नेतृत्व की भावना विकसित हो। नैन्सी ने आज यह साबित कर दिया कि यदि अवसर मिले, तो बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।” उन्होंने बताया कि शासन की यह पहल सिर्फ जागरूकता का अभियान नहीं है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति दृष्टिकोण बदलने का एक बड़ा प्रयास भी है।
घर और स्कूल में खुशी की लहर
नैन्सी के “एक दिन की डीएम” बनने की खबर जैसे ही उनके गांव और स्कूल में पहुंची, वहां हर्ष का माहौल बन गया। स्कूल की प्रधानाचार्या ने कहा “नैन्सी अनुशासित और परिश्रमी छात्रा है। आज उसने जो कर दिखाया, वह हमारे पूरे विद्यालय के लिए प्रेरणा है।” वहीं, नैन्सी के माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू झलक पड़े। उन्होंने कहा कि यह पल उनके लिए गर्व और भावनाओं से भरा है।
नैन्सी का संदेश — ‘हर बेटी खुद पर विश्वास करे’
कार्यभार संभालने के बाद मीडिया से बातचीत में नैन्सी ने कहा “आज महसूस हुआ कि एक अधिकारी बनकर समाज में कितना बदलाव लाया जा सकता है। मैं चाहती हूं कि हर बेटी अपने सपनों को साकार करे और खुद को किसी से कम न समझे।” इस एक दिन की जिलाधिकारी ने न केवल प्रशासनिक कुर्सी संभाली, बल्कि पूरे हापुड़ को यह सिखा दिया कि बेटियां अगर ठान लें, तो हर असंभव को संभव बना सकती हैं।
















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